11 फ़रवरी से 13 मार्च 2020 –

मैं “टेक2इन्नोवेट (TECH2INNOVATE)” कार्यक्रम/इवेंट को देखने के लिए दिल्ली गया था। टेक2इन्नोवेट दिल्ली में आयोजित एक इवेंट था। यह 14 और 15 फरवरी 2020 को आयोजित दो दिवसीय इवेंट था। इस इवेंट में, मुझे कई सोशल मीडिया प्रभावितों, सितारों, संगीतकारों और कई अन्य लोगों को देखने और सुनने का मौका मिला। मैंने इस इवेंट का एक संक्षिप्त वीडियो बनाया है, नीचे विडियो में इस इवेंट की कुछ झलकिया देखे …

मैंने दिल्ली में जंतर मंतर, बिरला मंदिर, इंडिया गेट, लाल किला और कुछ अन्य स्थानों का भ्रमण किया।

मैं अपने होम टाउन  “नवादा, बिहार” में अपने घर लौट आया 

मैंने “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला के पूर्ण होने हेतु सर्वेक्षण” की जाँच की। मैंने पाया कि एक व्यक्ति ने भी सर्वेक्षण में भाग नहीं लिया  है। और तब , मैं यह निष्कर्ष पर पहुंचा कि –

निष्कर्ष – महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला के पूरा होने में किसी को भी रूचि नहीं है। दूसरे शब्दों में, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हैं जो मेरी तरफ से अपने कल्याण की संभावनाओं में रूचि रखता है।

इस निष्कर्ष के आधार पर, मैंने कुछ निर्णय लिए हैं। मेरे निर्णय और मेरे निर्णयों का प्रभाव नीचे दिए गए है –

  • निर्णय 1अब तक,  मैं इस वेबसाइट को अपने प्राथमिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर, मैंने निर्णय लिया हैं कि अब से मैं इस वेबसाइट को अपने अतिरिक्त या साइड व्यवसाय के रूप में चलाऊंगा।

निर्णय 1 का प्रभावइस वेबसाइट का अस्तित्व इसलिए था क्योंकि यह वेबसाइट मेरे  वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम थी और बदले में, मैं खुद को सदस्यों और मानवता के कल्याण के कार्य में संलग्न करता। चूंकि मैंने इस वेबसाइट को अपने अतिरिक्त या साइड व्यवसाय के रूप में रखा दिया है इसलिए अब मुझे अपने  वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ अन्य माध्यमों की तलाश करनी होगी। और चूंकि यह वेबसाइट मेरा साइड व्यवसाय है, इसलिए मानवता और सदस्यों के सच्चे कल्याण  की सम्भावनाये बहुत सीमित हो जाएगी।

  • निर्णय 2मैं “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को निर्धारित समय पर प्रस्तुत करने में असफल रहा।मेरे व्यक्तिगत दोष और कई अन्य कारणों द्वारा “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” में काफी देरी हुई। लेकिन मेरा व्यक्तिगत इरादा हमेशा “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को निर्धारित समय पर पूरा करने का था और मैं यह करने की कोशिश में लगा था। हालांकि मैं असफल रहा लेकिन फिर भी मैं केवल कोशिश ही कर सकता था और मैंने वह किया । मूल रूप से, मैं “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहा था लेकिन चूंकि ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हैं जो “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” के पूर्ण होने में रूचि रखता हो , इसलिए अब मुझे भी “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को  पूरा करने की कोई जल्दी नहीं है। मैंने फैसला किया है कि मैं अपने जीवनकाल में “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को पूरा कर दूंगा।

निर्णय 2 का प्रभाव – “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” पूर्ण रूप से मौलिक ज्ञान प्रदान करता जो कि “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को देखने और उसका पालन करने वालों के लिए कल्याणकरक और लाभदायक होता।  लेकिन अब “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” के पूर्ण होने में काफी  देरी होगी इसलिए मनुष्यों के कल्याण में भी काफी देरी होगी और इसके अलावा, कई जागरूक मनुष्य “महाकाव्य ज्ञान वीडियो श्रृंखला” को देखने के लिए मौजूद भी नहीं होंगे।

इस समय पर, ऐसे कई पहलू हैं जिन्हें मुझे लिखना चाहिए जो कि “जागरूक मनुष्यों” को उनके स्वयं के भ्रम से अवगत कराये  और उन्हें  उनके कल्याण की तरफ ले जाए लेकिन अब मुझे इसमें कोई ख़ास रूचि नहीं हैं बल्कि मैं केवल  पांच प्रमुख तथ्य को लिखता हूं जिनसे “जागरूक मनुष्यों” को सच्चाई की थोड़ी झलक मिलेगी –

  1. मैं अपने जीवन की परिस्थितियों के लिए आभारी हूं, अगर मुझे पता नहीं चलता कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं हैं जो अपने  सच्चे कल्याण में रूचि रखता हो, तो  मैं अपना पूरा जीवन मानवता की निस्वार्थ सेवा में व्यतीत कर देता। लेकिन अब मुझे पता हैं  कि कोई भी अपने सच्चे कल्याण में रूचि नहीं रखता है, इसलिए आगे से, मैं मानवता के कल्याण में कम से कम और उचित रूप से संलग्न होऊंगा
  2. किसी भी मनुष्यों को मेरी तरफ से उनके सच्चे कल्याण की संभावनाओं में रूचि ना होने के कारन , मानवता के कल्याण में काफी ज्यादा कटौती हो गयी हैं जबकि मैं पूरी तरह से धन्य हो गया हूं। यह सिर्फ “चेतना का न्याय” है।
  3. जानबूझकर और अनजाने में, अपने स्वयं के भौतिकवादी स्वभाव के कारन जागरूक मनुष्यों ने मुझे बहुत यातनाएं दी हैं, लेकिन मैंने इस यातना को इस आशा में स्वीकार कर लिया कि जब जागरूक मनुष्यों का कल्याण हो जायेगा तब मेरी अनावश्यक यातनाए भी समाप्त हो जाएगी, लेकिन सर्वेक्षण के बाद, मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो गया हूं कि मनुष्यो/जागरूक मनुष्यों के अपने  कल्याण के प्रति अत्यंत खराब रवैये के कारण मेरी तरफ से किसी भी मनुष्य का कल्याण होना असंभव प्रतीत होता  हैं । पहले, मैं मानवता के कल्याण को सबसे अधिक महत्व देता था लेकिन आगे से , मुझे मानवता के कल्याण में कोई जल्दी नहीं है। 
  4. मैंने पहले ही सबसे उत्तम कार्य कर रखा हैं , इस वेबसाइट और इसकी सेवाओ से बेहतर कुछ भी नहीं हैं जो मैं किसी के लिए भी कर सकता हूँ । समस्या क्या थी? अगर कोई मुझसे कुछ भी चाहता था या किसी को भी मेरे बारे में कोई संदेह था या कोई भी अन्य विषय हेतु कोई भी इस वेबसाइट द्वारा मुझसे बात कर सकते थे,  मैं तो यहां उपलब्ध था और अगर आप मुझसे कुछ भी नहीं चाहते थे तो आपको मुझे नजरअंदाज कर देना चाहिए था। लेकिन इसके बजाय, मैंने मानवता के भीतर काफी मतिहीनता को देखा लेकिन मैं यह सब समझ सकता हूं, लेकिन बस एक बात जो मैं बिलकुल भी समझ नहीं सकता कि “कोई भी जागरूक मनुष्य अपने कल्याण की संभावनाओ के साथ खिलवाड़ या नज़रंदाज़  कैसे कर सकते हैं। ऐसा कौन सा कारन हैं जिसकी वजह से जागरूक मनुष्यों ने सर्वेक्षण में भाग नहीं लिया? अगर मैं जागरूक मनुष्यों के  स्थान पर होता तो मैं अपने कल्याण की संभावनाओं के साथ कभी  खिलवाड़ नहीं करता। मैं  सर्वेक्षण में जरुर भाग लेता।
  5. अब मैं अपने जीवन में पीछे की ओर देखता हूं, तो मुझे हर कुछ के प्रति मेरा मेरा सच्चा प्रेम दिखता हैं , मुझे  मेरे  व्यक्तिगत जीवन की भारी चुनौतियां दिखती हैं ,मुझे  मेरे व्यक्तिगत जीवन और इस वेबसाइट के संदर्भ में मेरी बड़ी असफलताएं दिखती हैं ,मुझे मेरे व्यक्तिगत दोष दिखते हैं , मुझे मेरी मुर्खता दिखती हैं जहा मैंने मानवता के कल्याण को खुद से भी ज्यादा महत्त्व दिया हैं और मुझे जागरूक मनुष्यों की मूर्खता दिखती हैं जहाँ उन्होंने अपने कल्याण की संभावनाओं को पूर्ण रूप से नकार दिया हैं और अब मैं अपने जीवन को आगे की तरफ देखता हूँ तो मुझे मेरा नया रूप  या एक नया मास्टर / सच्चा मास्टर दिखाई देता है।

 

 

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